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स्वच्छता

Laxmi Kumari 14 Aug 2026 कविताएँ समाजिक 816 0 Hindi :: हिंदी

स्वच्छता ही आधार शैली,
स्वच्छता ही विकास की सीढ़ी।
स्वच्छता बिना विकार आया,
हरेक को दुर्बल बनाएं।।

जब हो सफाई तन - मन से,
तब लगे हर कार्य में रुचि।
कार्यों में लगेंगे, फौलादी बाहों से,
तब होगा हर एक परिवार सूखी।।

जब हो वातावरण में शुद्धता,
मिले हवा ताजी मधुरता।
चारों और मिले शीतलता,
समझो स्वर्ग बना वसुंधरा।।

स्वास्थ्य जीवन का वास्तविक धन है,
ये ईश्वर का महान वरदान है।
हे मनुष्य ! 
पालन करो, स्वच्छ नियमों को,
ताकि बना सको सुलभ जीवन को ।।

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