संदीप कुमार सिंह 10 Aug 2026 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता जिन्दगी जीने की सच्ची राह बता रही है. 254 0 Hindi :: हिंदी
(मुक्तक छंद)
01
जिन्दगी को मैंने इस कदर देखा जिन्दगी मुझ में डूब गई।
मेरी हर चाहत को पूरा करने के लिए मुझ में डूब गई।
अब आलम यह है कि सारी दुनिया हमें देखकर हैरत में है--
चाँदनी की रोशनी में मेरी जिन्दगी अब डूब गई।।
02
नजर ने नजर को नज़र से ही कुछ नज़राना पेश किया।
चार नज़र अब कुछ पल के लिए यूं प्यार पेश किया।
नतीजा कुछ यूं निकला दोनों के पलक ही अब न झपके--
प्यार करने वालों के लिए एक गज़ब हुनर पेश किया।।
03
फौलादी वतन के फौलाद बनकर दुश्मनों को मारना।
खून गिरे तो गिरने देना पर दुश्मनों को मारना।
यही तुम पर मेरा आशिर्वाद है यही तुमसे मेरा विश्वास है--
जान जाए तो जाए वीर फिर भी दुश्मनों को मारना।।
04
पायल जब छनकती है आशिक सारे मचलते हैं।
जो दिल पे एक सुनहरा लेख ही लिख डालते हैं।
कहीं दूर रहने के बाद भी झंकार बनी रहे--
जो कानों में रसाल रस वाला सकून देते हैं।।
05
अधिकार खो कर चुप बैठना सबसे बड़ा दुष्कर्म है।
न्यायार्थ अपने बंधु को भी दण्ड देना सच धर्म है।
जन्म जो लिए मनुज कुल में एक भव्य मानवता दिखा--
ऐसे पुरुष जो थे कल उनका आज भी लहू गर्म है।।
06
वतनपरस्ती मेरे रग _रग में लहू बन के तूफानी रंग दौड़ रहा है।
गद्दारों का खून पीने के लिए बहुत दिनों से गला मेरा सुख रहा है।
जीना हुआ है मुश्किल अब तो और हमसब सैनिक नहीं करेंगे बर्दास्त--
फौलादी वतन के अदम्य फौलादियों जंग के लिए तैयार हो रहा है।।
07
हम भारत के लोग विभिन्नताओं में भी एक हैं।
नेक हृदयवालों के लिए दिल से हम भी नेक हैं।
भयानक मौत हूं दुश्मनों के लिए सभी हाल में--
दुनिया के लिए सदा ज्ञान मय हम सब अभिषेक हैं।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....