Nisha Kumari 25 Jun 2026 कविताएँ समाजिक Nisha ka अर्थ 4556 0 Hindi :: हिंदी
कहते थे कि अपने नाम का असर अपने जीवन पर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना अंधेरे में खोना नहीं अपना हुनर अंधेरे से ही पूरा होता ये ब्रह्मांड है।। तुम ऊषा तो नहीं हो भोर उजाले की न हो किरण इस दिनकर की रात्रि हो निशा हो यामिनी भी हो बस निखारो अपने आप में स्वयं को अंधेरे का मशाल बना लो।। जलने दो खुद को रोशनी सा इन अंधियारी गालियों में जहां न हो उजाला तो क्या हुआ तुम हो यह काफी है इस बात का एहसास भी है कराना।। तुम हो तो सपने सजाते हैं सब थोड़ा रुक सा जाते है सब इस भीड़ की थकन में कुछ पल आराम भी तो हो खुद में समेट लो इस जहां को रात्रि हो निशा हो रजनी भी हो तुम।। सूरज जब ढलता है होता है घोर अंधियारा तब होती है शीतलता इस चांद से ही सुकून भी तो तारों को देखकर है आता चांद की चांदनी भी तो रात से ही है।। कुछ अधूरा सा न रहे इस भीड़ में अपने आसमान को खुला रखना किरणे साथ तो नहीं देंगी हमेशा यह बात भी तुम याद रखना खोज लेना निरंतर अपने आप को चांदनी से कुछ उधार ही सही बनाए रखना अपनी चमक भी रात सा अपना जीवन न कर लेना।।