Laxmi Kumari 16 Sep 2026 कविताएँ राजनितिक राजनीति 885 0 Hindi :: हिंदी
राजनीति बन बैठा, अब रुपये का कारोबार पार्टियों के दफ्तर बन गए है बाजार । आज राजनीति ग्लैमर और फ़ैशन है, बस इससे रूपये का कनेक्शन है।। कभी थी राजनीति कुंजी जनशक्ति जहां होती थी कभी जनता की भक्तिव। अब राजनीति हो गई बस धनशक्ति , अफसोस, बनकर रह गई गंदा खेल राजनीति।। होनी चाहिए राजनीति "सिद्धांतों और मूल्यों का पर्याय" लेकिन आज बनी ये भंवरजाल का नाला ।। बदलने होंगे हमे, राजनीति के हालात, बदलनी होगी इसकी बदरंग तस्वीर । भंवरजाल में राजनीति के डूबने से पहले, आओ छोड़े अच्छाई की तूफा तीर।।