Nisha Kumari 25 Jun 2026 कविताएँ समाजिक रात का महत्व 3053 0 Hindi :: हिंदी
कहते थे कि अपने नाम का असर न होने देना रात सा अपना ये जीवन न कर लेना खो नहीं देना यू ही अपना हूनर अंधेरे सा अपना जीवन न कर लेना।। तुम ऊषा तो नहीं हो भोर उजाले की न हो किरण इस दिनकर की रात्रि हो निशा हो यामिनी भी हो रात्रि से ही पूरा होता यह ब्रह्मांड है।। सूरज जब ढलता है होता है अंधियारा रात के इन गलियों में चांद की रोशनी ही है तेरा सहारा इन धूमिल किरणों में ही न सिमट जाना।। रात्रि में ही तो सुकून है शीतलता है आसमान की कुछ सुकून मिले इन तारों में रात्रि तुम हो यह अहसास भी है कराना।। कुछ अधूरा सा है अपना जीवन उजाला तुम समेट लेना निरंतर खोना न अंधेरे में यूं अपना हूनर अपनी चमक बनाए रखना रात्रि हो निशा हो यह याद रखना।।