Santosh kumar koli ' अकेला' 23 Sep 2024 कविताएँ समाजिक सब कुछ बुरी 31109 0 Hindi :: हिंदी
ख़ाली हवेली बुरी, राज में रैली बुरी। मतलब की सहेली बुरी, पर नारीकेलि बुरी। जीवन में घुल गांठ बुरी, अफसर की डांट बुरी। भाइयों की आंट बुरी, दोस्ती में काट बुरी। झूठी गवाही बुरी, बहू -बेटी की हवाई बुरी। ग़रीब की हाय बुरी, घाटा की साई बुरी।