शाम हो चुकी है, सूरज भी ढल चुका, हल्की हल्की अंधेरा होने वाली है,
तभी एक महिला, हाथ पांव धोकर,
अच्छी कपड़े पहन कर, हाथ में घी का दीपक, लिए � read more >>
शायद हम पुराने हो गए है,
या रिश्ता पुराना हो गया है।
पहले जब रूठते थे तो वो मनाते थे हर बार,
पर अब छोड़ देते है वक़्त पर कि,
ठीक हो जाएगा स read more >>
मैं कितना नाजुक था, चलते चलते कभी मुंह के बल गिरता था, तब मेरे पिताजी, अपने हाथ देते थे, मैं उनकी अंगुलियां पकड़ कर, चला करता था, मैं जब भी � read more >>
जब मैं छोटा था, मेरे पांव कितने मासूम थे, पर मैं चलना सीखता था, कभी गिरता था कभी संभलता था, और जब थक जाता था, तब मां के आंचल में, छिप जाता था, read more >>
कोई भी प्राणी कि जब उत्पत्ति होती है, तो उसमें चेतना का समावेश होता है, हम अपनी चेतना को, साक्षात रुप से नहीं देख सकते, लेकिन उसे हम अपनी � read more >>