एक बार मेघ आ रही है,
तो एक बार धूप आ रहा है।
यह आंख_मिचौली का खेल,
सुबह से चल रहा है।
मुझे लगता आज दोनों में ठनी है,
एक दूजे को हराने का,
भर� read more >>
न शौक, न श्रृंगार ,न इच्छा न चाह हो,
न दु:ख हो न दर्द हो,कठिन भले ही राह हो,
तेरे बिना रहना कैसा?भाये भला तनहाइयां?
बनकर सदा चलता रहूं ,अमिट � read more >>
आज दिन में
धूप थी कुछ तेज ज़्यादा
क्यों ? कदाचित...
धूप के ये सूक्ष्म कण मानों
पसीने के कणों से मिल बने
कुछ खेत में, कुछ कारखानों में
तथा � read more >>