जब से देखा तुझे जानू,
क्या हाले दिल कहूं।
सिवा तेरे कुछ सूझता ही नहीं,
अपना नाम तो बता_
अपने घर का पत्ता तो बता।
सोख हसीना तूं ,
बेख्याल � read more >>
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जहाँ टपका दुखी आँसू, वहाँ घायल हुआ शिक्षक ।
जहाँ टूटा सपन कोई, वहाँ पागल हुआ शिक्षक ।
दुखों की राह में जग को, अकेला छोड़ता है कब-
जहाँ दे� read more >>
एक बार "मैं" फिर से "मैं " होना चाहती हूं ...ना किसी की अपनी न किसी की पराई होना चाहती हूं.. इन अनजानी राह में खुद का "वजूद" ढूंढना च� read more >>