काश कोई इस सुने दिल में फिर से दीप जला जाए
अपनों की इस दुनिया में
अपनों की परिभाषा बतला जाए
कुछ सपने हैं, जो अपनों के हैं,
कुछ अपने हैं ,ज read more >>
एक बार मेघ आ रही है,
तो एक बार धूप आ रहा है।
यह आंख_मिचौली का खेल,
सुबह से चल रहा है।
मुझे लगता आज दोनों में ठनी है,
एक दूजे को हराने का,
भर� read more >>
न शौक, न श्रृंगार ,न इच्छा न चाह हो,
न दु:ख हो न दर्द हो,कठिन भले ही राह हो,
तेरे बिना रहना कैसा?भाये भला तनहाइयां?
बनकर सदा चलता रहूं ,अमिट � read more >>
आज दिन में
धूप थी कुछ तेज ज़्यादा
क्यों ? कदाचित...
धूप के ये सूक्ष्म कण मानों
पसीने के कणों से मिल बने
कुछ खेत में, कुछ कारखानों में
तथा � read more >>