रे मन यूं न कर रे विलाप !
कब - तक करोगे विलाप ,
रे मन जाग जा रे अब !
रे मन बोल ,रे मन बोल !
हरि नाम तू एक बार बोल,
बन रे प्रेम भिखारी
बन के हरि की � read more >>
**"ज़ख्म का शोर"**
ये शहर के कोने, ये गलियों का अंधेरा,
जहाँ इंसानियत रोज़ मरती है, बिखरता है बसेरा,
बलात्कार की खबर, हत्या की दास्तान,
र� read more >>
"कलम"
"एक अरसे के बाद मेरी कलम ने फिर से कागजों की रेस में हिस्सा ले लिया है,और शब्दों से तुम्हें ढूँढने की कला में और भी माहिर हो गया है, इ� read more >>