"जिंदगी"
"जब कभी जिंदगी से हारने लगता हूँ,और खुद को अकेला पाता हूँ,तो कहीं रुक कर ओठों के ताज को सुलगा लेता हूँ,एक लंबा कश लेकर धुऐं के साथ read more >>
आज फिर मेरी जुवा लड़ खराने लगी है, उसकी यादे दिल को अंदर हि अंदर जलाने लगी है।धुंआ धुंआ सा मंजर आँखों पे छाने लगी है, लव भी उसी कि गीत गुनग� read more >>
क्या कहु ये आँखे क्यू तु आज भी रोता है, जब दर्द अपनो ने ही दिया है फिर क्यो पिरोता है।कुछ तो मजबूरिया होगी उनकी भी जो तुझे दर्द दे गया, उस � read more >>