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जिंदगी एक छोटी सी आशा छोटी सी एक जिंदगी है छोटी सी जीने की आशा इसी छोटी सी आशा में छुपी कितनी सारी अभिलाषा कौन देखा है कल का भोर फिर � read more >>
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सभी देवी-देवताओं के बीच इस बात पर विवाद हुआ कि आखिर धरती पर सबसे पहले किस देवता का पूजन होना चाहिए. सभी अपन� read more >>
उड़ने से पहले फड़फड़ाती है , ऊंचा पहुंच कर अपना रंग दिखलाती है । है अगर पकड़ मजबूत साधने वाले की , ढील पाकर ऊंचा और ऊंचा उड़ जाती । खुद आ read more >>
तेरे मेरे प्यार का इज़हार चलो यहीं खत्म करते हैं तुझे आजादी चाहिए था मुझसे चलो आज तुम्हें ऐ भी दे देते हैं क्या होगा दिल मेरा टूटेगा � read more >>
एक लड़की रोज शाम को 5:30 बजे पार्क में आकर वहीं एक बेंच पर बैठ जाती और उसके ठीक 10मिनट बाद एक लड़का भी उसी के पास आकर बैठ जाता वहां से दो बेंच read more >>
मेरी यह भूल- कि मैं रहूंगा बरकरार, बरकरार जग- ना कोई जीव बरकरार,, सोचा था- सजेगी बारात दूल्हा बनूंगा, पर आख़िरत- की सजेगी ए-डोली सबकी. read more >>
(दोहा छंद) कल क्या हो किसको पता,रहो मजे में यार। कर ले उलफत आज से,खुशियाँ मिले अपार।। कल क्या हो किसको पता,मरता कभी न प्यार। जीवन को गुल read more >>
(दोहा छंद) ऐसा कुछ कर जाइए,तन पर भव्य लिबास। मन में अति उत्साह हो,अनुपम सभ्य निवास।। ऐसा कुछ कर जाइए,जाए बन इतिहास। जिसे पढ़े दुनिया स� read more >>
(दोहा छंद) राधे राधे बोल कर,करिए शुरू प्रभात। दिन भर के परिणाम से,सुरभित हो जज्बात।। राधे राधे बोल कर, हो जाएं हम खास। टपके रस फिर बात � read more >>
(दोहा छंद) आदत से मजबूर जो, उस पर चढ़े न रंग। वो अपना ही चाल चल, करे काम को भंग।। आदत से मजबूर जो,सोचे कभी न खास। थोड़े में झूमे सदा,करके द� read more >>
(दोहा छंद) जब से नेता बन गए, मेरे कुछ जन यार। बात नहीं अब वह करे,भूला सभ्य विचार।। जब से नेता बन गए,छोटे छोटे लोग। आता जाता कुछ नहीं,पाले read more >>
"कभी क़ासिम तो कभी गजनी से भिड़ा ठाकुर ! हार तो तय थी...पर लड़ा ठाकुर ! हारना ही था उसे , वो अकेला जो लड़ा था , क्या जन्मभूमि ये तुम्हारी नही� read more >>
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