संदीप कुमार सिंह 30 Sep 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 22562 0 Hindi :: हिंदी
(दोहा छंद) राधे राधे बोल कर,करिए शुरू प्रभात। दिन भर के परिणाम से,सुरभित हो जज्बात।। राधे राधे बोल कर, हो जाएं हम खास। टपके रस फिर बात से,पूरे होंगे आस।। राधे राधे बोल कर,जीवन में भर रंग। होकर फिर रंगीन हम,रखें भव्य नित ढंग।। राधे राधे बोल कर,ऊर्जा मय हो गात। नव ऊर्जा से काम कर,करें सुहानी रात।। राधे राधे बोल कर,मन को रखिए शांत। रहें शांति से आप जब,जीवन में हो कांत।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....