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जब से नेता बन गए-मेरे कुछ जन यार

संदीप कुमार सिंह 30 Sep 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 29132 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद) 
जब से नेता बन गए, मेरे कुछ जन यार।
बात नहीं अब वह करे,भूला सभ्य विचार।।

जब से नेता बन गए,छोटे छोटे लोग।
आता जाता कुछ नहीं,पाले भ्रम का रोग।।

जब से नेता बन गए,जो पहले था चोर।
अब तो लम्बी बात कर,बनता फिरता मोर।।

जब से नेता बन गए,समझे खुद को खास।
बिन पेंदी के लोग ये,क्या जाने  अहसास।।

जब से नेता बन गए,ऐसे कुछ बदमाश।
करते काम अवैध यह,इनसे सभी निराश।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍️
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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