ज़मीं ये आसमाँ का हर नज़ारा उसी से,
जो गुमसुम हों, मिला हर सहारा उसी से।
कोई सहरा में भटके तो, मंज़िल बता दे,
जो हर मुश्किल में रहे, वो क� read more >>
मित्रों!
वो सूरज से पहले उठता है,
धरती माँ के माथे का पसीना बनता है।
ना महलों का मालिक है,
ना दौलत का आशिक है,
फिर भी दुनिया का अन्नदाता � read more >>