Shahaab Akhtar 02 Aug 2025 शायरी समाजिक समाजिक,इश्क,सैडशायरी 14546 0 Hindi :: हिंदी
तिज़ारत की तो,
क्या ख़ुदा को रखा सारिफ़ और ख़ुद के बीच में?
मोहब्बत की तो,
क्या ख़ुदा को रखा महबूब और ख़ुद के बीच में?
हुक़ूमत की तो,
क्या ख़ुदा को रखा अवाम और ख़ुद के बीच में?
कब तक यूँ नाकामी को
तक़दीर का लिबास पहनाते रहोगे?
क्या कभी हर अमल को हलाल मक़सद बनाया तूने?
~शहाब (साक)