MD SHAYEED ALAM 26 Jul 2026 शायरी देश-प्रेम शायरी मोहम्मद सईद आलम 2154 0 Hindi :: हिंदी
जालिम है तू ऐ हुक्मरान, ताकत के नशे में तू चूर है। बेशक बेमिसाल है लश्कर तेरा, पर इंकलाब का ये दौर है। लाठियां चलवाई निहत्थों पर तूने, उन बेचारों का क्या दोष है? हक मांगने निकले थे वे अपने घरों से, क्या आज अपना हक मांगना भी देशद्रोह है??