Pandit Vishal Mishra 30 Jan 2025 शायरी अन्य # यूं तो इंसान बहुत हैं # शायरी # जिसे देखो परेशान बहुत है 27529 0 Hindi :: हिंदी
खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं, जिसे भी देखो परेशान बहुत है करीब से देखा तो निकला रेत का घर, मगर दूर से इसकी शान बहुत है । कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं, मगर आज झूठ की पहचान बहुत है । मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी, यूँ तो कहने को इन्सान बहुत हैं । पंडित विशाल मिश्रा ।