Pratibha Khadekar 22 Aug 2024 शायरी दुःखद 34879 0 Hindi :: हिंदी
पिछे कोई नहीं अब अपने, सिवाय अपने आप के जाम बंजर बन गया, जिंदगी मे हर रिश्ता खंजर बन गया खिलाने पिलाने वाला मुक़द्दर लिखने वाले के आगे बेबस बन गया ।
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