Pandit Vishal Mishra 30 Jan 2025 शायरी अन्य #main jab likhta hu #Vishal Mishra 31967 0 Hindi :: हिंदी
मैं जब भी लिखती हूँ, बेशुमार लिखता हूँ।
कभी किसी की ख्वाहिश, कभी इज़हार लिखता हूँ।
मैं नये सपनों का खुमार लिखता हूँ,
कभी मंज़िल, कभी रास्ते, कभी इंतज़ार लिखता हूँ।
कभी अपनों में पराया, कोई किरदार लिखता हूँ,
कभी बिक जाते लोगों का, नया व्यापार लिखता हूँ।
कभी मुट्ठी भर दुनिया, कभी संसार लिखता हूँ।
मैं जब भी…
.. पंडित विशाल मिश्र ।