Afsana wahid (moin raza ghosi) 02 Jul 2025 शायरी प्यार-महोब्बत Afsana wahid, poetry, artikal, story, shairy, blog writing, content writing, etc 22928 0 Hindi :: हिंदी
--- मेरे आगाज़ का अंजाम क्या होगा, हर सवाल में मुझसे मेरा जवाब माँगा गया। लोगों ने मेरी ख़ामोशी से मेरे हौसले का वज़न तौला, और मेरी चाल से मेरे सफ़र का नक्शा माँगा गया। मैंने कहा — अंजाम तो किस्मत की ज़ुबान है, मगर आगाज़… वो मेरी पहचान है। हर रास्ता जो टेढ़ा है, हर मोड़ जो धुंधला, मैंने उसी को अपना मंज़िलनाम बनाया है। क्योंकि जो साफ़ रस्तों से डरते हैं, वो कभी खुद को नहीं पा पाते। जो मैं आज हूँ, वो कल का सपना नहीं था, वो रातों की तन्हाई, टूटे ख्वाबों और भीगे तकियों की कहानी थी। मेरी खामोशियाँ भी तेज़ बोलती थीं, पर सुनने वाले अक्सर शोर में खो जाते थे। मुझसे पूछा गया — तू कब तक अकेली चलेगी? मैंने मुस्कुरा कर कहा — जब तक मंज़िल मेरी बाहें खोल कर न कहे, "अब रुक जा।" और अगर कभी हार भी गई तो क्या? कम से कम ये इल्ज़ाम तो न होगा, कि मैंने कोशिश नहीं की। तो आज अगर पूछो… मेरे आगाज़ का अंजाम क्या होगा? तो सुनो — या तो मैं मंज़िल बनूँगी, या किसी और के सफ़र की रोशनी बन जाऊँगी। https://fktr.in/vXlwUv9