शरद भूषण मोंगरा 04 Jun 2026 शायरी समाजिक ईश्वर 184 0 Hindi :: हिंदी
"इत उत फिरता ढूंढता, जैसे मृग सुगंध। तैसे नर भया बावला, बाहर खोजे रंग"।। शरद भूषण मोंगरा
Login to post a comment!
...