माही मौर्या 24 Apr 2026 शायरी दुःखद सांसे हैं जब तलक़........... 9334 0 Hindi :: हिंदी
ये उम्र भी गुजर रही हैं, अब तो हम किसी से कुछ कह भी नहीं सकते.......!! मर गई हैं ख्वाहिशें सारी, अब तो खुद को ज़िंदा कर भी नहीं सकते..,....!!! सांसे हैं जब तलक़ ज़िंदा है आबरू....... अब ये हर किसी को बोलकर खुद को रुसवा कर नहीं सकते