संदीप कुमार सिंह 10 Aug 2026 शायरी समाजिक मेरी यह शायरी साधुओं के भेष में घूम रहे शैतान पर है. 2450 0 Hindi :: हिंदी
मुक्तक साधु बना शैतान है,संकट में है आन। किसको कहोगे अब सही,हैरत में है जान। कागा मोती चुग रहे,दाना खाए हंस-- समय समय का फेर है,साँप बना है मान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह*Author*
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....