MD SHAYEED ALAM 26 Jul 2026 शायरी दुःखद शायरी मोहम्मद सईद आलम 1852 0 Hindi :: हिंदी
यूं ही तल्ख नहीं है मिजाज मेरा, तुम्हारे जैसे ना जाने कितनों ने मेरे दिल को तोड़ा है। पल भर में ऐसे नहीं हुए हैं हम, न जाने कितनी बार टूट कर हमने खुद को जोड़ा है।।
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