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डॉ. अम्बेडकर
आग लगी थी जातिवाद की, छुआछूत का विषपान किया। अपमानों को गले लगाकर, संघर्षों का आह्वान किया। पुण्य धरा महू की शान हैं, देश के रत्न अम�
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पंखों पर जाली
**पंखों पर जाली, या सिस्टम की नाकामी पर पर्दा? — कोटा से उठता कड़वा सच** कोटा से आई एक वायरल वीडियो ने मन को झकझोर दिया है। हॉस्टल के कमरों �
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"સમયનો તકાજો"
વીતી રહ્યો જે વક્ત એને, પ્રેમથી સંભાળ તું, રેત માફક હાથમાંથી, જાય ના સરકી બધું. ક્યાં ખરચાયું આ આયુષ્ય? એનો જરા હિસાબ કર, વ્યર્થ વાતોમ
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"આવડતનું સરનામું"
માત્ર બેસી રહેવાથી કંઈ વળતું નથી, પરસેવો પાડ્યા વગર ભાગ્ય ખૂલતું નથી. ડિગ્રીના કાગળ તો માત્ર એક રસ્તો છે, આવડત વગર મંજિલનું સરનામુ�
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लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं
लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं तार है इंसानियत इंसान को है गम नहीं क्या सही है क्या ग़लत न तौलता इमान को मार कर इंसानियत को पालत�
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छप्पर वाले यार पुराने आंगन में
छप्पर वाले.... छप्पर वाले यार पुराने आंगन में औस टपकती रात सिराहने आंगन में चादर में ढकता हूं तन जैसे तैसे कैसे सोऊं रात बिताने आंगन मे
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क्यों तरसता तरसता सा है आदमी
"क्यों तरसता तरसता है आदमी", इस बड़े शहर की क्या कहूं दास्तान ना पेट में खाना है ना है सर पे मकान तन पे कपड़े नहीं सामने है दुकान कैसे ज�
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मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता
"मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता" मैं कुछ बेहतर नहीं लिखता यूं ही जिस ओर देखता हूं, दर्द में डूबे लोगों की "आह" जब भीतर उतरती है निकाल लाती है व
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"શબ્દોનું સામર્થ્ય"
ક્યારેક હળવા ફૂલ છે, તો ક્યારેક ઘા કરી જાય છે, આ શબ્દો જ છે જે શ્વાસમાં ધબકાર ભરી જાય છે. નથી હોતું કોઈ શસ્ત્ર કે નથી હોતી કોઈ ધાર એમાં,
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मुसलसल
मुसलसल जिंदगी बहती चली नदी के वेग सी कोई परिंदा दरख़्त पर बैठा हुआ मुझको देखता है मैं किसी कीड़े की भांति पत्ते पर बैठा किनारा खोजता
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दोबारा
उम्र भर पछतावा करने से अच्छा है, दोबारा से कोशिश की जाए, और सारी ताकत फिर से झोंक दी जाए।।
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"હપ્તે મળતાં સપનાં"
ક્યારેક કરિયર તો ક્યારેક જવાબદારી નડે છે, મધ્યમ વર્ગને સપનાં પણ હપ્તે હપ્તે જ મળે છે. આ લોકલ ટ્રેનની ભીડમાં જે ચહેરો થાકેલો છે, એ જ મ�
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