मतला:
वक़्त के आईने में मेरा सच नज़र आता है,
जो मैं बनकर चलता हूँ, वही रूप बन जाता है।
हर लम्हा सवाल बनकर रूह से टकराता है,
मेरी खामोशी क� read more >>
आज की सुबह दिनेश के लिए नासूर बनकर उगी थी।
वह अब भी अपने बिस्तर पर लेटा था। आँखें खुली थीं, पर उनमें उठने का कोई इरादा नहीं था—
मानो रात � read more >>
दुनिया ने मुझसे पूछा, तूने क्या कमाया है,
मैंने कहा, मेरे दिल ने सुकून पाया है।
सोने की चाह में जब चैन को भुलाया है,
हर रात ने मुझे मेरे � read more >>
जंगल का राजा भी बन जाता है तमाशा यहाँ,
जब अपनी चाल छोड़ दे, दुनिया की भाषा यहाँ।
पिंजरे सोने के हों तब भी, घुटती है हर साँस यहाँ,
आज़ादी � read more >>
हम सब यात्री हैं एक ही राह के,
नाम अलग हैं, मंज़िल एक,
कोई तेज़ चलता, कोई रुकता है,
पर समय सबका साथी एक।
कोई सिखाता, कोई सीखता है,
कभी जीवन read more >>