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पानी ही पानी छा गई चारों तरफ
जब नहीं आ रही थी बरसात, तब तो बहुत ही इंतजार था। जब आ गई अपने रूप में, होने लगी घमासान वारिश। पानी ही पानी छा गई चारों तरफ, लोग_बाग सब तर
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दिल में जगमग प्यार है- सभी लोग हैं शान
(दोहा छंद) पंकज सम मेरे नयन, लब पर है मुस्कान। दिल में जगमग प्यार है, सभी लोग हैं शान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप
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शुचिता मन में जो रखें-कहते लोग महान
(दोहा छंद) शुचिता मन में जो रखें, कहते लोग महान। ऐसे जन करते भला,सुरभित करे जहान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(�
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सुनकर मेरे शेर को-दे ताली सब लोग
(दोहा छंद) सुनकर मेरे शेर को, दे ताली सब लोग। हसी खुशी में झूमते,कानों से कर भोग।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(द�
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अड़चन बिन जिन्दगी नहीं-करें सामना आप
(दोहा छंद) अड़चन बिन जिदगी नहीं, करें सामना आप। कामयाब होंगें सदा, मिले नहीं संताप।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीप�
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सदा लक्ष्य हो प्रगति का-रखता हूं मैं ध्यान
(दोहा छंद) सदा लक्ष्य हो प्रगति का,रखता हूं मैं ध्यान। करता अथक प्रयास मैं, बढ़ता मेरा ज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिल�
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कलाकार वो खूब-रहे जिसमें दृढ़ मस्ती
(मुक्तक छंद) कलाकार वो खूब,रहे जिसमें दृढ़ मस्ती। जाऊं उसमें डूब,मगर डूबे मत कस्ती। रखूं जिया में लाज,रहूं दुनिया में मिलके_ संगी दुश�
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दुर्गम करतब मैं करूं-बालाजी हैं साथ
(दोहा छंद) दुर्गम करतब मैं करूं,बालाजी हैं साथ। करते संकट दूर सब,रखकर सिर पर हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(
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सावधान हम सब रहें-बनिए नहीं हराम
(दोहा छंद) खोया सपना में रहूं,मिले अत्यधिक हर्ष। करता सतत प्रयत्न मैं,प्राण करे उत्कर्ष।। अपना अपना ख्याल है, जीवन है संग्राम। सावधा
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समय सुहाना अब हुआ- उपजा मन अनुराग
(दोहा छंद) उपजा मन अनुराग जो,किया याद सब नात। बातें करकर सुख मिला,हुआ कांत मय गात।। समय सुहाना अब हुआ, उपजा मन अनुराग। आती सुखकर अब निद
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बेटी है अनमोल अति-बेटी है अनमोल अति जिससे है संसार
(दोहा छंद) बेटी है अनमोल अति,जिससे है संसार। धरा दिव्य गुलजार है,इनको भी दो प्यार।। मातु पिता की लाडली, बेटी है सौगात। इनको खुशियाँ दे
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टूटे बांध विकास के-हुए नागरिक मूक
(दोहा छंद) टूटे बांध विकास के,हुए नागरिक मूक। राम भरोसे चल रहा,दिखे नहीं निज चूक।। टूटे बांध विकास के,छाए बादल भ्रष्ट। जनता में अति छो
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