(दोहा छंद)
अवसर वादी हो गए, आज अधिकतर लोग।
अपना ही हैं देखते, खूब मिले जो भोग।।
अवसर वादी हो गए, सब नेता गण आज।
भरे तिजोरी खूब खुद, करे न व� read more >>
(दोहा छंद)
आशा के आकाश पर, दुनिया में है रंग।
और निराशा है जहां, बिगड़े उनके ढंग।।
आशा के आकाश पर, ही मिलते हैं चाँद।
फिर रहती है चाँदनी,� read more >>