(रोला छंद)
आया बचपन याद,खुशी से मैं तब झूमा।
एक एक कर याद,सभी ने मुझको चूमा।।
उस दिन के स्कूल,जहां करता था मस्ती।
बच्चों से अनुराग,और था � read more >>
सबको हक है खुलकर जीने का,
अपने सपने पूरे करने का,
बेटी हैं तो क्या हुआ,
उसको भी हैं हक जीने का,
कुछ बनने कुछ करने का,
जीवन में आगे बढ़ने का read more >>
जिंदगी ऐसा लगता है कि मैं भी तुम्हारी तरह मतलबी हो गई हूं मैंने भी जीने के लिए रास्ते चुन लिए अपने अलग तुम मुझसे दूर हो गई हो मैं तुमसे द� read more >>
अब जो आ गए हो तो दूर जाने की कोशिश ना करो अब उम्र के इस मोड़ पर ना वह समय है ना वह उम्र है ना वह शौक है ना वह कशिश है कि मैं तुम्हें याद करूं � read more >>
समय गुजरता ही गया हम कहां से कहां आ गए!
न जाने कब बचपन बीता, जवानी गुजरी ,इन हाथों से उम्र के कई वर्ष गुजरे!
पता ही न चला, हम कहां से कहां आ � read more >>
(दोहा छंद)
सभी बदलाव में लगे, आ जाए अब होश।
आया समय चुनाव का, लोगों में भी जोश।।
आया समय चुनाव का,उत्सव जैसा आज।
मुश्किल अब तो दौड़ है,घृ� read more >>
कभी कभी जीवन में ऐसा पल भी आता है कि मुझे यह लगता है कि मेरे लिए सभी रास्ते बंद हो चुके हैं और अब मैं कुछ भी जीवन में नहीं कर पाऊंगी मैं नि� read more >>
(दोहा छंद)
आया समय चुनाव का, पार्टी सब में होड़।
अपने अपने ढंग से, बनते सब बेजोड़।।
आया समय चुनाव का, करते सभी प्रचार।
खूब सभाएं हो रहे, अ� read more >>