(दोहा छंद)
डरना कभी न चाहिए, और रहें बन तीख।
दुख से बचे न राम जी, हम सब लें यह सीख।।
दुख से बचे न राम जी,जीवन का यह फेर।
मिले खुशी हर हाल मे read more >>
(दोहा छंद)
राजा हो या रंक हो,करिए कभी न अत्य।
दुख से बचे न राम जी, जीवन का यह सत्य।।
दुख से बचे न राम जी,जीवन का यह फेर।
मिले खुशी हर हाल मे read more >>
(दोहा छंद)
दुख से बचे न राम जी, वक्त बड़ा बलवान।
सुख दुख आते ही रहे, देते रहते ज्ञान।।
दुख से बचे न राम जी, सुख दुख से है प्राण।
हारे कभी न read more >>
(दोहा छंद)
बेकाबू जब मन रहे,चले न कोई जोर।
देते रब को दोष तब,रखे भावना चोर।।
चले न कोई जोर तब,मन की जब हो बात।
पहले ही हम भाँप कर,कर लेते ख read more >>
(रोला छंद)
चले न कोई जोर, करे मन हरदम अपना।
फिर भी अपनी सोच, पूर्ण करना है सपना।।
रखता सदा विवेक,तभी रहता मन काबू।
चलता अपनी राह, कहे मुझक read more >>
( मुक्तक छंद )
जीवन के अब यार क्यों, बिगड़ गए सुर ताल।
आओ कुछ मंथन करें,करिए खत्म बवाल।
महँगाई की मार से,कमर गई है टूट_
खोए अपने में सभी,बढ� read more >>