(मुक्तक छंद)01
जीवन का सब कामना, पूरा कर लूं यार।
आओ मिलकर बैठ कर, बातें कर दो चार।
तुम्हारा कुछ मैं सुनूं, कुछ मेरा तुम लोग_
सुख दुख बांट� read more >>
(दोहा छंद)
समय समय का फेर था, गए वनवास राम।
रावण का वध थे किए,अमर हुआ तब नाम।।
समय समय का फेर था, सत्य गया था हार।
भरी सभा में द्रौपदी, करी read more >>
दिल बहुत कुछ बोलना चाहता है,
मगर जुबान चुप रहती है,
मन उदास सा यूं रहता है,
एक आस सी टूटी लगती है,
कोई आए समझा जाए ना,
मेरे दिल को बहला जाए � read more >>