आज गगन में उड़ते पंछी
को देखकर न जाने क्यों?
मन यह सोच रहा है !
कितना ही अच्छा होता!
अगर बन जाते पंछी हम!
मस्त निर्भीक! होकर मस्त !
गगन मे read more >>
न जाने मन में उठते हैं क्यों?
हजारों सवाल !
न जाने दिल क्यों?
आज कह रहा है !कह दूं मैं भी
कुछ अपने दिल का हाल!
कहने को बहुत कुछ है!
मगर जुब read more >>
तुम्हारा पता में-
रब का नाम लिखा है,,
रब का पता में-
तुम्हारा नाम लिखा है,,
तुम्हारा शरीर ही-
उसका ठिकाना है,
ये वाक्या सरेआम लिखा है...!!!
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