वो दिन,, जो भूले न जा सके,,
जब हम स्कूल में पढ़ते थे उस स्कूली दौर में निब पैन का चलन जोरों पर था..!
तब कैमलिन की स्याही प्रायः हर घर में म� read more >>
*लकिरी पहेलियां*
*_कभी-कभी अनीश निकेतन की बालकनी में बैठ जाता हूं, और घंटो देखता रहता हूँ, अपने हाथों की हथेली की लकीरों को जो खिंची है। � read more >>
तू ही आरंभ है- तू ही अनंत है!
तू आदि है-
तुझ से पुरानी कोई चीज नहीं
तू नूतन है-
तुझ से नई कोई चीज नहीं
देखा ना-
अव्वल तुझसा,
तुझ से ऊंची क read more >>
पिता का पत्र समाज व पुत्रों के नाम...
शहर के एक मध्यवर्गीय बूढ़े पिता ने अपने पुत्रों के नाम एक पत्र लिखकर खुद को गोली मार ली ।
चिट्टी क्� read more >>