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कलयुग ने किया हर शब्द को काला इसने मां शब्द पर भी लगाया दाग बिल्ली जैसे अपने बच्चे को भूख लगने पर है खा जाती वैसे ही कुछ स्त्रियों ने मा� read more >>
कोई तो है-(मां पर कविता) मन में जीवन में जीवन भर सदा के लिए दिल में बसी, कोई तो है। हर एक दुख में दर्द में सामने खड़ी हो जाती है read more >>
यूं ही- निगाह टिकती नहीं कहीं! आपकी निगाह- किसी विशेष खास पर स्थिर है आप स्वीकार करें- आपका दिल पसंद करता है उसे अब- आपको परवाह करनी � read more >>
"जो कुछ भूतकाल में घटित हुआ है, उसी का भविष्य में घटित होने की संभावना है। अतः यदि जनसंख्या की वृद्धि दर में स्वैच्छिक नियंत्रण नहीं लग� read more >>
ज़िंदगी के- चाहे कितने ही पड़ाव पार करके आए- कोई मायने नहीं रखते जब- स्वयं के अंतरतम, की गहराई से गुज़रेंगे तब जीवन के- वास्तविक मा read more >>
यह बेहतरी- उस बेहतरीन सत्ता, की ओर से बख्शा गया है हर क्षण उस- बेहतरीन सत्ता का अंश है दया- और कृपा से भरा हुआ है लौट कर- कभी वापस नही� read more >>
कली को स्वतः स्वच्छंद, ज़रा खिलने दो। खुद को खुद से, ज़रा मिलने दो। जो जैसा है, वैसा, ज़रा बनने दो। मन को मन की, ज़रा सुनने दो। तोड़ो, मर� read more >>
बनावटी जिन्दगी कितनी बनावटी जिन्दगी जीने लगे है हम ? झूठा रोने लगे है हम झूठा हँसने लगे है हम | एक चेहरे पर कई चेहरे लगा कर जीने लगे है ह read more >>
नमस्ते दोस्तों 🙏🙏 आयुष पिछले 1 घंटे से अपनी मम्मी को कॉल कर रहा था , पर उसकी मम्मी उसका कॉल उठा ही नहीं रही थी । तभी उसके पापा पंकज घर म� read more >>
आज संकुचन को मिटाकर चलो पथ गामी बने। है धरा निस्तेज अलौकिक रूप के स्वामी बने। हदय पर यह बोझ कितना, था ही उसका साथ कितना, मन की इस विचलि� read more >>
कविता = ( कलयुग ) कथनी करनी में फ़र्क़ हुआ ! यह कलयुग का प्रभाव !! कर्म हुए दानव जैसे ! बातों से भगवान !! भगवा भी बदनाम हुआ ! भगवे में शैतान read more >>
चूड़ियां और लडकियां चूड़ियां और लड़कियां, एक अनूठी कहानी, जैसे चंद्रमा की छाँव, बिखेरे रंगों की जवानी। चूड़ियां सजी, हाथों में खिल� read more >>
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