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संतति के सिर पर साये सा, माँ के माथे की बिंदिया है पिता महज एक व्यक्ति नहीं है, कायनात है, पूरी दुनिया है जिसकी चमक सहज ही अम्मा की आंखो� read more >>
प्यार का रोग किसे नहीं लगा है। कौन है ऐसा जो प्यार में नहीं पड़ा आज कल का प्यार थोड़ा अलग होता है। जैसे प्यार के नाम पर किसी किं हत्या कर read more >>
जिस तरह देश में दंगे फसाद हो रहें है। यह बुलकुल सही नही है। आखिर कहाँ जा रहाँ है। हमारा देश पहले सरकार ऐसे लोगों को पालती है। और बाद में � read more >>
खाना बंद लिए उन हाथों में दिन के उजाले जग चुके हैं एक भीड़ है जो तरस रही है एक काम की तलाश में वो काम को पाल सकता है उन नन्हे नन्हे कोप� read more >>
लहरों से- खेल-खेल में गहराई, में गोता लगा रहा हूं खारे समुद्र में मीठी स्वाति का वह बूंद-ढूंढ रहा हूं दूर कहीं- उजला प्रकाश से, दमकता � read more >>
सुनेंगे, जमाने को जो सुनते हैं, सच- झूठ, झूठ- सच लगता है साकी को विवेक सखा जो है, मैं निभाता रहूंगा सुनने तक -मोती read more >>
एहसास जो कुदरत का हो, तोहफा है सब कुछ- बेमिसाल झरता ये अमृत का झरना, घट में टपके- वाणी में सुवासित घुला हो जीवन का ये ज्योति- प्रज्वल� read more >>
Agriculture Robot: Economical Friend of Farmers Farmers are decreasing in India in the agriculture sector. Some are leaving the farming profession by repeating common sentences that it is no longer profitable, becoming risky day by day. Its disadvantages do not allow even the youth to take interest in it. Robotics will surely bring the agricultu read more >>
कृषि रोबोट: किसानों का किफायती दोस्त कृषि क्षेत्र में भारत में किसान घट रहे हैं। कुछ सामान्य वाक्यों को दोहराकर खेती के पेशे को छोड़ read more >>
वाह रे इंसान ! तू भी क्या खूब फर्ज निभाता है। इंसानियत को रौंद के,मंदिर में जाता है । *** भूखे,निर्धन की भूख मिटाने से पल पल तू कतर read more >>
हम कौन थे..... कहां पर रहे हैं कहा जा रहे हम। पश्चात सभ्यता में पलते जा रहे हम।। यहीं के जगत गुरु थे सारे जहां के । वेदों की ज्ञान गंगा बह read more >>
मज़बूत बन मज़बूत बन ऐ मन, मज़बूत बन। संघर्षो का नाम है जीवन, सीता भी भटकी थी वन वन। पैरों में उनके छाले थे, पैरों में बेडियां डाले थे। � read more >>
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