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सितारों का आशियाना....
चांदनी रात में- सितारें खिलते हैं, आसमानों में किसी ने ये जाना- आशियाना बसा है, दिल की दुनिया में गगन तो है छाया -मोती
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आंतरिक दुनिया और जगत....
संपूर्ण दृश्य जगत, प्रतिच्छाया है- आंतरिक दुनिया का -मोती
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ज़िंदगी के सफ़र में आओ चलें हम....
ज़िंदगी के- सफ़र में आओ चलें हम, मिलेंगे मंज़िल इन राहों में हमराही मेरे हम न- कभी होंगे जुदा इन राहों में ग़म भुला के सदा- हम रहेंगे
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पल पल गुज़र रहे हैं....
वो दिन गुज़र गए- चले गए जिंदगी से, कहीं दूर देश-परदेश में पल-पल गुज़र रहे हैं लौट के आए नहीं- ना कोई संदेशा आया, पल-पल गुज़र रहे हैं अब
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गुरू महिमा
पाहन बीच पावक का बास, पाहन रहे अज्ञात। सत्य की चोट लगे सतगुरू की, हो असत्य का पात। मृग नाभि में बसे कस्तूरी, ज्यों घन में बरसात। ढूंढ़ च�
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कण कण को
अम्बर वरसे नैना तरसे बून्द बून्द पानी को प्यासा मनवा तरसे मुठी भर भूख को अंजुरी भर जल को अतृप्त अखियाँ तरसे ठोप ठोप नीर बहे अधर मे�
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पिघल रहा
थोड़ा थोडा रोज़ जिंदगी पिघल रहा जैसे साम रोज़ सूरज ढल रहा बून्द बून्द पानी को जैसे आशमा तरस रहा बस उसी तरह जिंदगी जिंदगी से बिछड़ रहा �
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कृष्ण कोन है ‌‌‌‌
वर्तमान में कृष्ण वहीं है, जिसने अपनों में फर्क बताया है।। जिसने अपनों के बीच भी, सत्य की जंग का ऐलान करवाया है।।
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लिफाफे में बंद प्रेम
लिफाफे में बंद प्रेम सरे आम हो गया मन के पीड़ा तन के कष्ट पल भर में उजागर होता था चिठ्ठी नहीं लिखना पड़ता व्हाट्सअप से काम चलता हैं कु�
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सचेतन को वक्त है अनमोल....
सचेतन को वक्त है अनमोल.... वक्त की दऱक में पड़ा था वह हीरा गुज़र गए हम दस्तक देंगे लौट के वक्त जो गुज़र गए हैं -मोती
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अथाह प्रेम की महक....
अथाह प्रेम की महक.... तुम्हारी सुकून भरे चेहरे से निकलती आभा मेरे अंदर की संगीत को झंकृत करती है यही तो अथाह प्रेम की महक है जो मुझम
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प्रेरणा....
ये खूबसूरत पल के लिए- कुछ बदसूरत पल, लाजमी हो सकता है क्योंकि बिना कांटे के- गुलाब कहां मिलते जनाब आख़िर- कीचड़ में ही कमल खिलते हैं
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