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🙏मेरा परिवार 🙏🏻
मैं कालिन्र्दी पाल (बिटूल)निघुवामाऊ जिला सीतापुर की रहने वाली हूँ। मैने इंटर गणित से प्रथम श्रेणी में पास किया है मैं बी.टेक. करना चाह�
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जालिम दुनिया
जालिमो की दुनिया में, इंसान भी जालिम हुए। इस दुनिया में घमंडी शराबी, इंसान भी जालिम हुए। यह दुनिया कितनी जालिम है, यहाँ राज छुपाना प�
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जीवन जीने की कला
शीर्षक---जीवन जीने की कला जीवन, चाहे जैसा हो जीवन जीने की एक कला सीखना चाहे रास्ते हो कितने भी संघर्ष भरे उस पर चलने की एक कला सीखना
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जिथे मन भयरहित असते.........
जिथे मन भयरहित असते आणि जिथे ज्ञान मुक्त असते तिथे डोके उंच असते. अरुंद घरगुती भिंतींमुळे जगाचे तुकडे झालेले नाहीत, हे सत्यातून आलेल�
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रंग बिरंगी तितली
तुम्हें उड़ता फूलों पे देख उर में उठते प्रशन अनेक फूलों के कानों में कुछ कह जाती हो या फिर प्यार भरा चुंबन उनको दे जाती हो फिर झूम उठत
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सखी रे कोयलिया गाती तो होगी....
सखी रे चल रे चल ! कोयलिया- गाती तो होगी, फाग सुनाती तो होगी। फागुन की- मस्त बयारों में बहकते गाते, सखी रे चल रे चल। नदिया के पार- आम की �
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नारी
नारी है दुनिया की धरनी, नारी ही तो जग की जननी। नारी है तो दुनिया होगी, नारी बिन दुनिया न होगी। नारी का न करो अपमान, नारी से ही दुनिया महा
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नारी
नारी है दुनिया की धरनी, नारी ही तो जग की जननी। नारी है तो दुनिया होगी, नारी बिन दुनिया न होगी। नारी का न करो अपमान, नारी से ही दुनिया महा
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फूलों की व्यथा
*फूलों की व्यथा* इस बगिया का एक है माली अलग अलग है क्यारी रंग बिरंगे फूलों से सजी ये लगती प्यारी प्यारी।। मनमोहक फूलों की गंध से मह�
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कलयुग की कली
कविता -कलयुग की कली कली, अधखिली सोंच में थी पड़ी, तरुणा में करुणा लिए क्रंदन का विषपान पिए रति छवि का श्रृंगार किए मन में ली वह व्य�
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बसंती बयार में फागुन के राग !
राहगीर मैं आया हूं, सुर साथ लाया हूं हवा छेड़ेगी हर साज, मौसमें बहार गाऊंगा बसंती बयार में फागुन के राग -मोती
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ऋतुराज जो आए हैं बारह मास के बाद....
ऋतुराज- जो आए हैं, बारह मास के बाद। बहकती- चली बसंती बयार, ओढ़ के पीली चुनरिया।। खिल रहें- ये सरसों के फूल, खुशबू बिखेरने लगीं हैं। ख
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