दुआ है-
हे पीहर की तू है राजदुलारी!
तुम्हारी यादों का-
यह मेला रह-रह के गुजरता है!
हंसी और रूठने-
मनाने का हर सिल-सिला!
तुम ही तो थी घर-
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पता नहीं क्यों दिल को यह महसूस हो रहा है कि जीवन में कुछ कमी रह गई इस कमी को पूरा करने का मैंने बहुत ही दिलों जान से प्रयास किया परंतु फिर read more >>
इस दुनिया मे वही महान,
करे जो माँ बापू का मान!
बडो का वो भी कहना माने,
छोटो को भी दे सम्मान !
सांच कहे या झूठ कहे,
उसका जो कभी न देता जवाब!
द� read more >>
कविता- मैं श्वेत धवल शीतल जल हूं!
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी- 31/01/2023
मैं जल हूं!
मैं श्वेत धवल हूं शीतल हूं।
मैं जल हूं! मैं जल हूं।
नभ से read more >>