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मैं उस तत्व का अंश हूं....
मैं उस तत्व का अंश हूं जो पृथ्वी,जल,अग्नि, वायु और आकाश का गति है समस्त ब्रह्मांड- का सृजनात्मक स्रोत, मेरे अंदर से विकसित होकर मेरे �
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संपूर्ण ब्रह्मांड का स्रोत....
निज स्वरूप- में स्पर्श है सांसों का, जो स्रोत है जीवन का। ये अनुराग है- ईश्वर का या संपूर्ण, ब्रह्मांड का स्रोत मौजूद है -मोती
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सभ्य नागरिक
सुख शांति के लिए मानव तो जन्म से ही प्रयास करता है, शिक्षा के द्वारा ही वह तो मानसिक शक्ति को पाता है। शिक्षा के द्वारा ही वह तो सभ्य �
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तत्व ज्ञान के बिना शून्य....
संपूर्ण जीवन की- सार्थकता समस्त कर्म, तत्व ज्ञान के बिना शून्य समस्त कर्म- तत्व ज्ञान के बिना शुन्य! -मोती
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श्रेष्ठतम मानवीय गुण....
श्रेष्ठतम मानवीय गुण- स्वयं का रूप को तत्व ज्ञानी, समय के महापुरुष से जानना श्रेष्ठतम मानवीय गुण! -मोती
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चालू हे सखी होरी में....
चालू हे सखी होरी में! चालू हे सखी रंग गुलाल ले आओ री। देवरी में आंगना में रंगोली सजाओ री।। कौन बजावे ताशा हम बजावे ढोलकिया। चालू हे स�
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ओस के ये मोती तपती किरण में उड़ रही है....
ओस के ये मोती- तपती किरण में उड़ रही है! मन को लुभा रही है, माया की ये छाया उड़ रही है दृश्य जग-जन- भंवर जाल में उलझ रही है काया में- आती
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मुरादें
भगवान मेरी तो ये मंजिल अब तेरे ही तो सहारा है, पूरी कर दे मेरी मुरादे हम इंसानियत के लिए हारे है।
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उपदेश बिनु उपवास कहां मोरे मन....
उपदेश बिनु- उपवास कहां मोरे मन! शरण में आया सतगुरु के, तन-मन अर्पा और शीश हृदय में धर गुरु वचन, सेवा किया चरणों में अर्पण याचना किया- �
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क्या खूब ये जिंदगी झलक रही है....
क्या खूब ये- जिंदगी झलक रही है, ये जीवन महक रहे हैं नजरों में घूम- रही है ये स्वर्ग सी धरती! दिव्य दृष्टि की- महिमा इतनी मेरे सतगुरु, श
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प्रेम और स्नेह
प्रेम स्नेह में बहुत ही शक्ति होती है इसका एक बहुत बड़ा उदाहरण हमारे भगवान श्रीकृष्ण हैं जो इतने बड़े राजा इतने बड़े भगवान थे परंतु सु
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खुशी
खुशियों को पाने के लिए क्या-क्या नहीं करते हम जबकि हम भूल जाते हैं कि हमारे मन में दूसरों के प्रति भरा हुआ है गुस्सा, नफरत ,जलन .यही हमा
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