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कविता = परदेश
⭐ कविता = ( परदेश ) कैसा ये परिवेश हुआ ! घर ही मेरा परदेश हुआ !! एक ही छत के नीचे ! जैसे पूरा देश हुआ !! घर के हैं जो घरवाले ! आज हुए वो बाहरवाले
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हमारे ही बीच से कबीर होना चाहिए।
किसी के गम में बह जाए, आंखों में नींर होना चाहिए। हर बुराई से भिड जाए, ऐसा वीर होना चाहिए। किसी को लानत भेजें और किसी को झिडक दे। हमारे ह
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मां से बड़ा ममता किस्में हैं
मां से बड़ा ममता किस्में हैं। प्यार तो हर किसी से होता है। पर मां अपने बेटे को जान से ज्यादा प्यार करती है।। जरूरत पड़ने पर भी मां अपन
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व्यथा तीची
व्यथा तीची सांगे कुनास तीचे दुःख तीच्या मनात परक धन माहेर म्हणे सासर म्हणे लोकाची कार नक्की घर कोणते इचे ही विचारे कुणास दोन घरांच
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इंसानों की दुनिया
भगवान ने इंसान को इंसान बनाया, इंसान ने उसे हैवान बनाया । भगवान ने इंसान को एक समान बनाया, इंसान ने सिक्ख,ईसाई,हिन्दू,मुसलमान बनाया । �
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क्यों भूल गए
क्यों भूल गए ढिबरी लालटेन जला के पढ़ना गांव चौपाल बो दरवाजे के चौखट बो बरगद के पेड़ उसका आश्मान से जमीन तक लटकता सोर उसके छाव के निचे �
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*प्रेरक कहानी* 🌸🌸🌸🌸🌸 *अजनबी हमसफ़र ……* 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर......करण सिंह💐/*प्रेरक कहानी* 🌸🌸🌸🌸🌸 *अजनबी हमसफ़र ……* 💐प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर......करण सिंह💐/अजनबी हमसफ़र/
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मैं एक घर अब बनाने चला हूं।
बचपन का सपना सजाने चला हूं। मैं एक घर अब बनाने चला हूं।। प्यार की ईंटों से नींव बनाने को, अपनत्व के गारे से जोड लगाने को। आंधी और तूफान
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तेरी हर निशानियां....
तेरी हर निशानियां- मेरे नजरों से गुजर रहें हैं, हैरान हूं दिल में खंजर चल रहें हैं -मोती
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अपने ही वजूद में....
अपने ही वजूद में- श्वास को महसूस कर, तुम्हें रब का एहसास मिलेगा -मोती
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पावन नाम....
पावन नाम! तेरे नाम का संबल, हर तूफान में सहारा -मोती को
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तेरे नाम की महिमा अपरंपार....
तेरे नाम की महिमा- अपरंपार सब का सहारा, हम बालक- गाते तेरे चरणों की महिमा तेरे नाम की महिमा अपरंपार! -मोती
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