ये दुनिया है दूसरी-
जो हम देख रहे हैं!
हकीकत-
नजरों से ओझल है,
मन के इस पर्दे में!
ये हैं माया की नगरी-
जो तुम देख रहे हो!
ये दुनिया है दू� read more >>
कविता- मुहब्बत है गांव में!
रचना- जितेन्द्र शर्मा
तिथी-25/01/2023
माना कि थोडी सी गुरबत है गांव में।
शर्म है, रोटी है, मुहब्बत है गांव में।
read more >>