मित्रों!
वो सूरज से पहले उठता है,
धरती माँ के माथे का पसीना बनता है।
ना महलों का मालिक है,
ना दौलत का आशिक है,
फिर भी दुनिया का अन्नदाता � read more >>
सुहावनी सी सुबह हुई थी ,
दोस्त का साथ था ।
दिन जन्म अष्टमी का था ,
भक्त में राधे का था ।
जन्म दिन बहुतों का था ,
किसी का तारीख से तो किसी क read more >>
आज के युग में लोग
जाति के नाम पर लड़ रहे हैं,
पर उन्हें क्या खबर…
कि वे अपने ही समाज से दूर हो रहे हैं।
भाई-चारे की डोर
अब नफरत से टूट रह� read more >>
तिज़ारत की तो,
क्या ख़ुदा को रखा सारिफ़ और ख़ुद के बीच में?
मोहब्बत की तो,
क्या ख़ुदा को रखा महबूब और ख़ुद के बीच में?
हुक़ूमत की तो,
क्या ख़ुदा को read more >>