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"शूरवीर"
अपने पर जीत हासिल, करे वो शूरवीर। उसी के वश यह शरीर, शेष मन के गुलाम।। मोती-
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"प्रेरणा"
असफल होना बड़ी बात नहीं है। असफलता को- स्वीकार करना बड़ी बात है। अगर हमने- स्वीकार नहीं किया। तो चलना सीख जाएंगे।। मोती-
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"तारणहार"
कण-कण में बसता, जग में व्यापक वो। रहता सबके अंदर, वहीं नीयता तारणहार।। मोती-
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"प्रकृति मनोरम"
अद्भुत प्रकृति मनोरम, गुलशनें हैं बहार। चहकता महकता चमन, इश्क है बेपनाह।। मोती-
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शायरी
जन्नत चाहते चाहते जहन्नुम मुक्कमल हो गई नसीबा खुब खाक झेला हमने जो जीना भी मौत से बद्तर बन गई।
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कभी तो
कभी तो अंधेरा हटेगा कभी तो रौशनी मिलेगी कभी तो खुसियां मिलेगी तब गम शर्माकर मुहं छुपा लेगी । कभी तो तन्हाईयां महफ़िलें होगी अपनी भी
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जाड़े की धूप
कविता -जाड़ें की धूप बादलों की झुरमुट से झांकता सूरज मानों खेलता नन्हा ओज से भरा बालक झांक रहा हो, चमकता तेज सुनहरा बदन रक्त लाल
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राह नहीं आसान
प्राण संघर्ष पूर्ण है, राह नहीं आसान। फिर भी बुलन्द हौसला, से मिलती पहचान।। जीवन में हैं कष्ट नित, राह नहीं आसान। सुख दुख को है झेलना, �
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*प्रेरक कहानी* *पिता पुत्र के प्यार का अंतर* 💐सपनों का सौदागर......करण सिंह💐
★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ *प्रेरक कहानी* *पिता पुत्र के प्यार का अंतर* 💐सपनों का सौदागर......करण सिंह💐 ★★★★★★★★★★★★★★★★★★★★ 👇👇👇 पापा प�
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"संत कौन"
अपने अंतःकरण स्थित, सत्य को तत्व रूप से। जाना हुआ व्यक्ति, ही संत है।। मोती-
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"राग दीपक"
अलंकृत कर रिद्धि-सिद्धि, चहकें राग रागिन। जगीं निशा हर सिंगार, दरबार मनभावन।। मांँ सरस्वती की-कृपा, समाई ह्रदय-कमल। प्रस्फुटित कंठ
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पुनर्जन्म की अभिलाषा
मैं चाहता हूं, मेरा धरा पर आना_जाना लगा रहे, अधूरे ख्वाबों को पूर्ण करने का प्रयास चलता रहे। वसुन्धरा माता बड़ी प्यारी हैं, तीनों लोक �
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