मैं जब भी लिखने बैठती हूं तो यही सोचती हूं कि मैं वही लिखो जो मुझसे और मेरी सोच से जुड़ा हुआ हो जिससे मैं और मुझसे जुड़े लोग भी बहुत ही ज् read more >>
अगर झुकता नहीं चरणों में, यूं ही सर किसी के तो।
तो जाओ दर पे दाता के, झुकाना सीख जाओगे।
अगर मुस्कान लानी है, किसी के‌ चेहरे पे तुमको।
त� read more >>
आज की युवा पीढ़ी खुद को भूल रही है ।
प्रेम की झूठी परिभाषा में खुद को तोल रही है ।
निज जीवन के कर्तव्यों को भूल गई है ,मात पिता के बलिदानो � read more >>