"माँ के बराबर कोई नहीं "
माँ शब्द सुनते ही, जो भाव मन में आते है,उनको को कह पाना, समझा पाना, वयक्त कर पाना कठिन ही नहीं, असंभव सा read more >>
टी स्टाल पर हाथ-पर-हाथ धरे बैठे हुए एक शख्स से मैंने पूछा,‘‘तुम अक्सर इस चाय की दुकान पर बैठे मिलते हो। आसपास कहीं काम करते हो क्या?&rsqu read more >>
अपनी-अपनी नाप लो, अपनी-अपनी लो तोल।
खेल है औक़ात का, औक़ात का है मोल।
आज जो जहां खड़ा, पड़ा, मिली जीत या मात है।
फूलों का हार पड़ा गले, चाह� read more >>