मैं गांवपहुंचता हूं तो देखता हूं कि गांव में सब कुछ पहले जैसा ही है मेरा बचपन मेरे गांव में ही बीता मेरे माता पिता किसान थे हम दो भाई थे � read more >>
कभी वक्त था तो वक्त ना था ,डरते थे कहने से ।
मुस्किल में होते वो , तब डरते थे उनकी मुस्किल सहने से ।।
वो रोज अदब से सुबह सर नवाते थे , क्या read more >>
आज उदासी से भरा बाग में बैठा था ,पता नहीं क्या मन में था ?
ना किसी की याद थी ,ना कोई यादों में ।
ना कोई बात थी , ना मै किसी के वादों में ।।
म read more >>
बैठा बारव्हीं सीढ़ी पर ,
भूला अपने आप को था |
ना था साथ किसी का ,
बस दर्द का साथ था |
मै बैठा था ,
जिस सीढ़ी पर |
वो इस सफर का ,
आखिरी पायदान थ read more >>