पसीने की क़ीमत, किसने आंकी?
हाथ कुदाली, सिर पर परात, दिखती श्रम की झांकी।
पसीने से ही, धरती का दामन पसीजता है।
चोटी से एड़ी का पसीना, धरा � read more >>
बस अब गीत नहीं लिखने हैं-
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- एक गीत आपकी समीक्षार्थ-
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