एक नन्ही सी कली हूं,
मां तेरे आंचल में ही पली हूं,
सिर्फ एक इंसाफ के लिए चली हूं,
वह इंसान जो हक है हमारा ,
फिर क्यों ?
फिर क्यों ?
नोच दिय� read more >>
मत करो नारी पर जुल्म, स्वतंत्रता नारी का अधिकार ।
शायद ये सब भूल गए, है नारी से संसार।
इक रूप में नारी है माता, इक रूप में नारी धनदाता।
इ� read more >>
सांस की उलझी डोर है, मन भी हारा हुआ है;
होगा यही परिणाम अगर तो फिर अपना शान क्या हो?
हे ईश्वर! दे वो शक्ति-की ये जग वरदान सा हो।
अपने-अपनो � read more >>
मैं ये नहीं कहती हूँ कि बाकी भाषाएँ नेक नहीं
अंग्रेजी बोलना अच्छा है पर हिन्दी त्यागना ठीक नहीं
—त्रिशिका श्रीवास्तव ‘धरा’ read more >>