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// सुप्रभात....
// सुप्रभात ... सुबह हो गई , चल बेटा उठ ...! उठ बेटा उठ , बहुत गया सुत ...! जो सोया , वो खोया ...! जो जागा , वो पाया ...! समझ में तेरे , तुझे...आया कुछ ...!
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अंडे दिए हैं शायद दड़बों मे बटेरों ने
दायरा समेट लिया चुपके से सवेरों ने कदम रख दिया हैं लगता है अंधेरों ने हमारे जाल मे हलचल काहे को होगी दरिया खंगाल लिया कब का मछेरों ने
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जब नफरत बांटनी हो पूरी पूरी बांट दोगे
मुहब्बत के इस आंगन मे दूरी बांट दोगे क्या जंगल लूटकर हमे बेनूरी बांट दोगे मुहब्बत बांटने मे बड़े कंजूस हो तुम लोग जब नफरत बांटनी हो प
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औरत ऐक पहेली
औरत ऐक ऐसी पहेली है, जिसे आज तक कोई भी नहीं सुलझा पाया क्युकी, औरत के अनेकों रुप होते है, बाबुल के आंगन मे खुशियां बिखेरती हुई राजकुमारी
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गरीबी
गरीबी एक ऐसी समस्या है, जिसके आगे, जात,पात,अशिक्षा, सही गलत ,मान,समान सारी समस्याऐ घुटने टेक देती है,और मैंने इसे बहुत करीब से देखा है
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मनुष्य
मनुष्य का अगर सुरत ठीक न हो तो सिरत ठीक कर लेनी चाहिए क्योंकि सिरत ठीक होने पर सुरत का पॉलिश अपने आप हो जाता हैं|
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उस दिन मेरी होली होगी
उस दिन मेरी होली होगी जिस दिन आँसू नहीं झरेगा जिस दिन जीवन नहीं मरेगा हास्य उड़ेगा आँगन-आँगन चारों ओर ठिठोली होगी । उस दिन मेरी हो�
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विदाई
✍️विदाई* 👍👍👍👌👌👌 बेटी की विदाई के वक्त बाप ही आखिरी में क्यों रोता है । सभी रिश्ते भावुकता में रोते है , परन्तु बाप अपनी बेटी के बचपन �
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अनुशासन
अनुशासन से ही हम अपनी मंजिल को पा सकते हैं|
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पथिक
तुम सृजन पथ के पथिक, नित-नित नव निर्माण करो। लक्ष्य भेदन खातिर, तन- मन से संधान करो। राहे सुगम है नहीं, पग- पग कांटे बिखरे हैं। चलता जाए
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नारी सभ्यता की रक्षा
नारी शक्ति है, सम्मान है नारी गौरव है, अभिमान है नारी ने ही ये रचा विधान है हमारा शत-शत प्रणाम है। भारतवर्ष में नारी हमे
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इंसान हो तो इंसानियत का फर्ज निभाओ
इंसान हो तो इंसानियत का फर्ज निभाओ,रोते हुए को चुपाओ, आंशु प़ोछकर उसके, होंसला दिलाओ।
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