आदमी की औकात...
एक माचिस की तिल्ली,
एक घी का लोटा,
लकड़ियों के ढेर पे,
कुछ घण्टे में राख.....
बस इतनी-सी है,
आदमी की औकात !!!!
एक बूढ़ा बाप शा read more >>
सुबह जल्दी जगाने, सात बजे को आठ कहती है।
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है।
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़ती है।
छोटी छो� read more >>
दिल की बस्ती मे ले के आयें हैं,
चाँद मुठ्ठी मे ले के आयें हैं,
झूठ तुम को लगे तो तुम जानो,
हम तो सच्ची मे ले के आयें हैं,
कोई दुल्हन हो जैसे read more >>
पिता की भावनायें
माँ को गले लगाते हो, कुछ पल मेरे भी पास रहो !
’पापा याद बहुत आते हो’ कुछ ऐसा भी मुझे कहो !
मैनेँ भी मन मे जज़्बातोँ क� read more >>
दिन बदलते हैं ,साल‌ भी बदल
जाते हैं, हर वक्त एक सा नहीं रहता,
यहां लोग बदल जाते हैं,
खुद के भरोसे ही नाव चलाना,
यहां मांझी ही पलट जाते है� read more >>
//... कैसे हो भैया ...//
क्या पुराना और
क्या नया है भैया...?
वैसे , ऐसे और
कैसे हो भैया...?
वही देते ,
वही बटोरतें...!
वही चोर हैं और
वही लुटेरे...!
क� read more >>