ये आँख-आँख नही है, गहरा दरिया है,
नज़र बदले नही हैं, बस बदला नज़रिया है।
दुनिया के हर रहम में कुछ ख़ास छिपा है।
कहने को सब सही हैं, नही तो सभी � read more >>
कदम हार के डर से आगे ही नही जाते हैं,
हारे हुए लोग कुछ, जीत की अहमियत सिखाते हैं।
वे हारे हैं.... मैदान छोड़कर भागे तो नही,
उनको इतना अनुभव न read more >>
देखते ही देखते जवान,
“माँ-बाप” बूढ़े हो जाते हैं…
सुबह की सैर में,
कभी चक्कर खा जाते है,
सारे मौहल्ले को पता है,
पर हमसे छुपाते है&hellip read more >>
चल रहा हु रास्ते से अनजान हूँ,
लिख रहा हु हर लफ्ज से अनजान हूँ,
कुछ बात होगी मेरे जीने मे
जी रहा हूँ पर दर्द से अनजान हूँ,
एक मोड़ आया जिं� read more >>
माँ झूठ बोलती है,
सुबह जल्दी उठाने सात बजे को आठ कहती
नहा लो, नहा लो, के घर में नारे बुलंद करती है ,
मेरी खराब तबियत का दोष बुरी नज़र पर मढ़त� read more >>